उत्तराखंड

आपदा के बाद राज्य सरकार की पहल, केंद्र से लापता लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की मांग

Death Certiicates for missing person: उत्तराखंड में मानसून सीजन के दौरान आई भीषण आपदा ने प्रदेश को गहरे जख्म दिए हैं। तेज बारिश, भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाओं के चलते दर्जनों लोग लापता हो गए, जिनमें से कई के जीवित लौटने की उम्मीदें अब लगभग नही हैं। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए केंद्र सरकार से लापता 67 लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की अनुमति मांगी है।

प्रमाण पत्र जारी करने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी

आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि नियमों के मुताबिक किसी व्यक्ति को लापता होने के सात साल बाद मृत घोषित किया जाता है, लेकिन इस आपदा की गंभीरता को देखते हुए हमने केंद्र सरकार से अपील की है कि विशेष परिस्थितियों में तुरंत मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा, बीमा और अन्य सरकारी राहत योजनाओं का लाभ जल्द मिल सकेगा।

लापता व्यक्ति को मृत घोषित करने को सात साल जरुरी 

वर्तमान नियमों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति लापता होता है और उसका कोई सुराग नहीं मिलता, तो उसे कानूनी रूप से मृत घोषित करने के लिए सात वर्षों का इंतजार करना पड़ता है। लेकिन आपदा की विकट परिस्थिति में यह नियम पीड़ित परिवारों पर अतिरिक्त मानसिक और आर्थिक बोझ डालता है।

राज्य सरकार की इस पहल से न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता मिलने का रास्ता भी खुलेगा।

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