उत्तराखंड

हल्द्वानी : कुमाऊं की प्राचीनतम दिन की रामलीला में आज रावण जन्म और नारद मोह की लीला का हुआ मंचन

कुमाऊं की प्राचीनतम दिन की रामलीला में आज रावण जन्म और नारद मोह की लीला का मंचन व्यास पुष्कर दत्त शास्त्री जी के निर्देशन में कराया गया। इस प्रसंग में दर्शाया गया है कि कैसे भगवान अपने भक्तों के कल्याण के लिए माया का विस्तार करते हैं और अहंकार को दूर करते हैं। व्यास जी कहते हैं कि नारद का घमंड तोड़ने के लिए भगवान ने विश्वमोहिनी का सृजन किया और उनके स्वयंबर का आयोजन किया ,विश्वमोहिनी के रूप को देखकर नारद मुनि का वैराग्य विचलित हो जाता है, और वे भगवान से उनका रूप मांगते हैं, भगवान उनको हरि यानी बंदर का रूप दे देते हैं, जब नारद जी को स्वयंबर में अन्य लोगों ने बताया कि आपका रूप बंदर का है तब वे नाराज हो कर भगवान विष्णु को श्राप देते हैं कि आपने मुझे बंदर का रूप दिया एक दिन इन्हीं बंदर की आपको सहायता लेनी पड़ेगी, आज के मंचन में भगवान विष्णु का पाठ कुनाल पाण्डेय ने नारद का पाठ यश मिश्रा ने तथा रावण का पाठ किया।
आज व्यास पूजन प्रदीप जनोटी जी, महेंद्र बोरा जी, पं विवेक शर्मा जी, सुशील शर्मा जी, रोहित खैरवार, सचिन जायसवाल, यश गुप्ता ने किया। जिसमें व्यास मंच का संचालन अतुल अग्रवाल ने किया।

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