व्रत त्योहार

ज्येष्ठ अमावस्या पर स्नान-दान का होता है विशेष महत्व, इन उपायों से मिलेगी पितृ दोष से मुक्ति

सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक साल में 12 अमावस्या पड़ती हैं। इनमें से ज्येष्ठ माह की अमावस्या शामिल है। इस साल 06 जून को ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पड़ रही है। इसे दर्श अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन शनि जयंती और वट सावित्री व्रत भी किया जाता है।

अमावस्य़ा तिथि पितृ दोष व ग्रह दोष से राहत पाने के लिए बेहद शुभ दिन माना जाता है। ज्येष्ठ अमास्या के मौके पर पवित्र नदियों में स्नान, तर्पण, पिंडदान, पूजन, जप-तप और दान का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसा करने से जातक को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। तो आइए जानते हैं ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व, पूजा विधि, मुहूर्त आदि।

ज्येष्ठ अमावस्या पूजा मुहूर्त

ज्येष्ठ अमावस्या तिथि- 6 जून 2024

ज्येष्ठ अमावस्या की शुरुआत – 05 जून 2024 को शाम 07:56 मिनट से

ज्येष्ठ अमावस्या का समापन – 06 जून 2024 को शाम 06:08 मिनट पर

अमावस्या तिथि स्नान मुहूर्त – 06 जून 2024 को सुबह 04:59 मिनट से 05:15 मिनट तक

दर्श अमावस्या का महत्व

ज्येष्ठ माह की दर्श अमावस्या के मौके पर पितृ तर्पण का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पितृ प्रसन्न होकर जातक पर कृपा बरसाते हैं। वहीं पितरों के आशीर्वाद से व्यक्ति के घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है।

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