नई दिल्ली

एच1एन1: दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 2446 मरीज, स्वास्थ्य मंत्री ने दिए निर्देश

नई दिल्ली : राजधानी में एच1एन1 के 138 नए मामले सामने आने के बाद दिल्ली सरकार ने सरकारी अस्पतालों को फ्लू से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर कर दिया है। दिल्ली में कुल एच1एन1 के मामलों की संख्या 2446 पहुंच गई है। इसके बाद सभी अस्पतालों के इमरजेंसी विभाग में समर्पित फ्लू कॉर्नर बनाने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक अस्पताल में कम से कम पांच आइसोलेशन बेड तैयार रखने होंगे। बड़े अस्पतालों में इन्फ्लूएंजा और दूसरी संबंधित बीमारियों के मरीजों के लिए 10 या उससे अधिक आइसोलेशन बेड की व्यवस्था की जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बुधवार को सभी सरकारी अस्पतालों के मेडिकल डायरेक्टर और मेडिकल सुपरिटेंडेंट के साथ वर्चुअल बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान सभी सरकारी अस्पतालों को इमरजेंसी, जांच, आइसोलेशन, दवाओं और 24 घंटे मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को घबराने के बजाय सतर्क रहने की सलाह दी गई है। संदिग्ध मरीजों में लक्षण मिलने पर तुरंत जांच कराने और जरूरत के अनुसार स्वैब लेकर जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए वायरल ट्रांसपोर्ट मीडियम और सैंपल लेने से जुड़े जरूरी सामान का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा गया है।अस्पतालों को शिफ्ट के हिसाब से ड्यूटी रोस्टर तैयार करने और डॉक्टरों तथा मेडिकल स्टाफ की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। इमरजेंसी में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की तैनाती भी होगी। बैठक में मंत्री ने दवाओं की उपलब्धता की भी समीक्षा की। अस्पतालों को जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने और इसकी नियमित रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्तर पर दवाओं की खरीद करने को भी कहा गया है, ताकि मरीजों के इलाज में किसी तरह की रुकावट न आए।

बैठक में बच्चों और बुजुर्गों को विशेष निगरानी में रखने के लिए कहा गया है। अस्पतालों को इन संवेदनशील आयु वर्ग के मरीजों की समय पर जांच और उचित इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन्फ्लूएंजा के लक्षण और बचाव की जानकारी देने वाले बैनर भी अस्पतालों के इमरजेंसी और भीड़ वाले स्थानों पर लगाने को कहा गया है। दिल्ली में अब तक इन्फ्लूएंजा-ए के कुल 3177 मामले दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार मामलों के रुझान और अस्पतालों की तैयारियों पर नजर रख रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। अब तक अस्पतालों में आए ज्यादातर मरीजों में हल्का बुखार और सामान्य लक्षण मिले हैं और वे एक-दो दिन में ठीक हो गए। सरकार ने अस्पतालों में बेड, जांच, दवाओं और इमरजेंसी सेवाओं की पर्याप्त व्यवस्था की है। उन्होंने लोगों से सांस से जुड़ी स्वच्छता, हाथों की सफाई, सही तरीके से मास्क पहनने और खांसी-छींक के दौरान सावधानी बरतने की अपील की। लक्षण होने पर भीड़ वाली जगहों से बचने और खासकर जोखिम वाले लोगों को तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने को कहा गया। उन्होंने लोगों को खुद से दवा लेने से भी बचने की सलाह दी।

स्मार्ट सिटी में स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को छह नए मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि की है। इसके साथ ही जिले में संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश में फरीदाबाद में स्वाइन फ्लू के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि सभी मरीजों की हालत स्थिर है और किसी की स्थिति गंभीर नहीं है।

जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नए संक्रमित मरीजों का उपचार जिले के निजी अस्पतालों में चल रहा है। मरीजों में बुखार, खांसी और जुकाम के साथ सांस लेने में परेशानी की शिकायत थी। इसके बाद परिजन उन्हें निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। स्वाइन फ्लू की आशंका होने पर चिकित्सकों ने जांच कराई और सैंपल बीके अस्पताल में भी जांच के लिए भेजे गए। रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद मरीजों को स्वाइन फ्लू संक्रमित घोषित किया गया।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक नए मामले शहर के सेक्टर-11, 12, 16, 17, 21 और ग्रेटर फरीदाबाद क्षेत्र से सामने आए हैं। इनमें बुजुर्ग मरीजों की संख्या अधिक है। स्वास्थ्य विभाग ने बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

स्वास्थ्य विभाग संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए लोगों को भी चिन्हित कर रहा है। संपर्क में आने वाले लोगों को खांसी, जुकाम, बुखार या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत खुद को स्वस्थ लोगों से अलग रखने की सलाह दी गई है। साथ ही स्वाइन फ्लू की जांच कराने और रिपोर्ट आने तक सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामभगत ने बताया कि बुधवार को छह नए मामले सामने आए हैं। सभी मरीज निजी अस्पतालों में उपचाराधीन हैं और कोई भी गंभीर स्थिति में नहीं है।

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